Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

कोष में पाला (Sheath blight)

PrintPrintSend to friendSend to friend

हाल में उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में इस रोग को बहुत गंभीर माना गया है।

इस रोग के कारण पत्ते के कोष पर धब्बे अथवा जख्म के निशान पाए जाते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में यह फैलकर लीफब्लेड तक फैल जाते हैं। जख्म के निशान बड़ा, मध्य में धूसर सफेद दीर्घाकार आकृति और भूरे-लाल रंग अथवा पर्पल लाल किनारों वाला होता है। अगली अवस्थाओं में, जख्मों पर  स्क्लेरोशिया का निर्माण होता है जो बाद में टूट कर अलग हो जाता है। गंभीर ममालों में, पौधे के सभी पत्ते कुम्हला जाते है जिसके परिणामस्वरूप पौधे मर जाते हैं। यह एक मिट्टी से उत्पन्न होने वाला रोग है।  

यह रोग Rhizoctonia solani के कारण होता है। फंगस स्क्लेरोशिया का निर्माण करता है जो डार्क ब्राउन-टु-ब्राउन ग्लोबोज़ और 4-5 मिमी व्यास होता है।  

फंगस का स्क्लेरोशिया मिट्टी में कई महीनों तक जीवित रहते हैं और भूमि तैयार करने के दौरान ये जल की सतह पर तैरते रहते हैं। स्क्लेरोशिया पौधों को संक्रमित करता है और माइसेलियम का निर्माण करता है जिसके कारण धब्बे अथवा जख्म के निशान पड़ते हैं। उच्च आर्द्रता और ऊष्ण तापमना में बहुत घातक होता है। पौधे के बीच की कम दूरी और अत्यधिक मात्रा में नाइट्रोजन के प्रयोग से रोग के बढ़ने की संभावना तेज हो जाती है।  

रोग के नियंत्रण के उपायों में शामिल हैं: 

 प्रतिरोधी प्रजातियों की खेती करना 

 खेतों से जल निकास  

 0.1 % Cerasan wet के साथ मिट्टी का उपचार  

Pseudomonas jluorescents का अनुप्रयोग अर्थात् बीजोपचार  (600 g/ha) मिट्टी के अनुप्रयोग (2.5 kg/ha) को ध्यान में रखते हुए। 

 

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
डॉ. कृष्णवेनी (DRR)
Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies