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स्टैक बर्न

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1. रोग के लक्षण अंकुर, वयस्क पौधों के पत्तों, और दानों पर वृत्तीय से लेकर दीर्घाकार गहरे भूरे धब्बे के रूप में प्रकट होते हैं जो बाद आगे चलकर आपस में मिलकर बड़े धब्बे बन जाते हैं। गंभीर मामलों में, बिचड़े मुरझा जाते हैं और पत्तों पर छोटे-छोटे काले धब्बे उभर आते हैं जो गोलाकार फंगस के पिंड के रूप में होते हैं। अनाजों पर, हल्के भूरे से लेकर गेहूं रंग के जख्म दिखाई पड़ते हैं जो गहरे काले किनारों से घिरे होते हैं और दाने रंगहीन हो जाते हैं।  

2. इस रोग का कारण Alternaria padwickii नामक जीव है। कोनीडिया लंबवत रूप से फैल जाता है, इसके शीर्ष पर एक लंबा चोंच होता है, 3-S सेप्टेट, क्रीम पीले रंग का, मोटा, सीधा लेकिन सेप्टा पर संकीर्ण होता है। फंगस गोलाकार काला स्क्लेरोशिया भी उत्पन्न करता है। 

3. यह रोग बीजों से होकर प्रसारित होता है जिसके कारण नर्सरी के बिचड़े में प्राथमिक संक्रमण होता है और द्वितीयक संक्रमन वायुजनित बीजाणुओं अथवा सिंचाई जल के कारण फैलता है। 

निम्नलिखित विधियों द्वारा रोग का नियंत्रण किया जा सकता है:  

 संक्रमित ठूंठी और पुआलों को नष्ट करने से रोग की संभावना कम हो जाती है।  

 IS मिनट तक  SO-S4°C तापमान पर गर्म पानी से उपचार करना चाहिए।  

 

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
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