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Package of practices for variety “Danteshwari” ( For Kharif Season)

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खेत की तैयारी: 

दो या तीन बार जुताई एवं जड-जुताई करने के बाद मिट्टी को अच्छीF तरह से पीट कर गारा बना  लेना आवश्य क है जिससे कि खरपतवार खेत में अच्छीन तरह से मिल जायें। 

बुवाई : 

मानसून के आक्रमण के बाद सीड ड्रिल या नारी हल की मदद से 20 सें.मी. की दूरी पर बुवाई की जाना चाहिये।

बीज दर:

70-80कि.ग्रा./हेक्टेकयर बीजों का प्रयोग एक सीध में बुवाई करने के लिये किया जाना चाहिये।

खरपतवार प्रबंधन:

आरंभिक पौध प्रतिस्प:र्धा से बचने के लिये खरपतवारनाशी का प्रयोग किया जा सकता है।  इसके लिये, 1.50 Kg a. i/ha बूटाक्‍लोर या 1.00 kg a. i/ha पेंडामेथालिन का प्रयोग (प्रत्या।रोपण के 3 या 5 दिन बाद) उत्थाान-पूर्व स्थिति में गीले खेत में करना चाहिये। बुवाई के 25-30 दिनों के बाद यांत्रिक या मानवी तरीके से खरपतवार को निकाल देना चाहिये। 

उर्वरक:  

60-80 कि.ग्रा.नायट्रोजन/हेक्‍टेयर; 40-50 कि.ग्रा. P2O5/हेक्‍टेयर; 30-40 कि.ग्रा. K2O/हेक्‍टेयर

उर्वरक प्रयोग करने का समय:

फॉस्‍फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा एवं 50% नायट्रोजन को गाढ़ी मिट्टी में आधारीय के रूप में ड़ाला जाना चाहिये। बचा हुआ नायट्रोजन सक्रिय जुताई के समय एवं फसल की PI अवस्‍था में दो समान भागों में बाँट कर टॉप ड्रेसिंग कर देनी चाहिये। 

आधारीय के रूप में ड़ाला गया उर्वरक मिट्टी में अच्छीब तरह समा जाना चाहिये; वरना ड़ाला गया नायट्रोजन विविध माध्यंमों से व्यमर्थ हो जायेगा। हलकी ज़मीन के नीचे 30 % नायट्रोजन का प्रयोग प्रत्यामरोपण से पूर्व एवं अच्छीा तरह से गारा बनाये हुये खेत में करना चाहिये।    40% नायट्रोजन सक्रिय जुताई के समय ड़ाला जाना चाहिये जब कि बची हुई 30% मात्रा फसल की PI  अवस्था  में ड़ाली जा सकती है। यूरिया को नीम की टिकिया या नीम के अवक्षेपों  के साथ उपचारित करने से ड़ाले गये नायट्रोजन की दक्षता में वृध्दि होती है; इसलिये, इस प्रौद्योगिकी का प्रयोग खरीफ़ के मौसम में किया जाना चाहिये। 

पौधों की सुरक्षा:

आवश्‍यकतानुसार एवं बताये गये सुरक्षा उपायों का अनुपालन करना चाहिये। धान की खरीफ़ फसल के लिये अन्यए परंपरागत तरीकों का प्रयोग भी करना चाहिये। 

 

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