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ब्लास्ट रोग (Blast Disease)

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ब्लास्ट रोग (Blast Disease)

1. कारक जीव – मैग्नापोर्था ग्राइसिया का प्रकोप उत्तर पूर्वी राज्यों में बहुत अधिक है।

2. यह रोग फसल को उसके विकास के हरेक चरणों में प्रभावित करता है जैसे नर्सरी, टिलरिंग और फूलों की अवस्था में।

3. किस्म और पर्यावरण की स्थिति के अनुसार फसल उत्पादन में 36-50% तक की क्षति होती है।

ब्लास्ट रोग के लक्षण ( Symptoms of blast disease)

1. पत्तियों के सामान्य घाव तंतु (स्पिन्डल) आकार के होते हैं जिसके केंद्र में भूरा (ग्रे) रंग होता है और जिसका किनारा आमतौर पर लालिमायुक्त पीला (रेडिश येलो) होता है।

2. अतिसंवेदनशील किस्म के पत्ते सूख जाते हैं। फंगस (कवक) तने के नोडों को भी प्रभावित कर सकते हैं जिस कारण इसका गहरा भूरा रंग काला हो जाता है और यह आसानी से टूट सकता है।

3. घाव पैनिकल नेक में भी हो सकता है। संक्रमित नेक काला हो जाता है और फिर टूट जाता है। नेक ब्लास्ट की वज़ह से पैनिकल में कुछ ही बीज पनप सकते हैं या बिल्कुल भी नहीं।

File Courtesy: 
सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
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