Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

ब्लास्ट रोग का प्रबंधन ( Management of blast disease)

PrintPrintSend to friendSend to friend

ब्लास्ट रोग का प्रबंधन ( Management of blast disease)

A) ब्लास्ट-प्रतिरोधी की अलग-अलग किस्मों का उपयोग करें।

B) रासायनिक नियंत्रण

1. नर्सरी में बोने से पहले या ऊंची भूमि (अपलैन्ड) में होने वाले चावल के प्रसारण से पहले बीजों को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में भिगोना चाहिए।

2. तराई भूमि (लो लैन्ड) में होने वाले फसलों में अपरूटिंग (जड़ से उखाड़ने) के बाद अंकुरो को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में 12 घंटों के लिए जड़ तक भिगा कर उपचार करें।

3. बैविस्टिन (0.1%) के बाद हिनोसैन (0.1%) या डाइथेन M-45 (0.25%) का छिड़काव पहली बार रोग के प्रकट होते ही पाक्षिक (15 दिनों के) अंतराल पर किया जाना चाहिए। रोग पर ठीक से नियंत्रण प्राप्त करने के लिए स्प्रे घोल के साथ सैन्डोविट या ट्राइटोन का उपयोग स्टिकर @0.2% के रुप में किया जाना चाहिए। तराई भूमि की फसलों के लिए खेत में स्थिर पानी होने पर टिलरिंग और बूटिंग अवस्था में 2 बराबर मात्रा के डोज़ में 30 कि.ग्रा/हेक्टेयर की दर से किटाज़िन ग्रैन्यूल्स 17G का प्रयोग करें।

C) नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों की अधिक मात्रा के प्रयोग से बचें क्योंकि :

1. नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों की अधिक मात्रा रोग को फैलने में मदद करती है।

2. ऊंची भूमि की स्थिति में 40-60 कि.ग्रा/हेक्टेयर और तराई भूमि की स्थिति में 50-60 कि.ग्रा/हेक्टेयर की दर से नाइट्रोजन का उपयोग तीन बराबर स्प्लिट डोज़ में निम्नानुसार होना चाहिए:

  • बोने या ट्रांसप्लांटिंग के 1 सप्ताह बाद
  • टिलरिंग और
  • पैनिकल की प्रारंभिक अवस्था।
File Courtesy: 
सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies