Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

सफेद-सिरे के निमेटोड के मेज़बान-परजीवी सम्बन्ध

PrintPrintSend to friendSend to friend

1. चावल के पौधों के विकास की प्रारम्भिक अवस्था में ए.बेस्सेयि एंडो-परजीवी तरीके से 7-10 दिनों तक कोलिओप्टाइल में भोजन लेता है और बाद में पौधों की वृद्धि के चरणों के दौरान पत्ती के सबसे अन्दरूनी आवरण के भीतर एक्टो-परजीवी तरीके से।
2. टिलरिंग की विलम्बित अवस्था में, निमेटोड की संख्या तेज़ी से बढ सकती है, और पौधे के प्रजनन चरण के दौरान एक चोटी तक पहुँच सकती है।
3. अंडाशय की बाहरी दीवार को नुकसान के कारण गुठली आंशिक रूप से भरती है और लोडिक्यूल्स को नुकसान एंथेसिए के बाद फूल को बन्द होने से रोकता है, जो भ्रूण को ऑल्टर्नारिआ पड्विकी के प्रक्रमण का सामना करा देता है और बाँझपन उत्पान करता है (राव और राव, 1979)।
4. ए.बेस्सेयि की जीवन रक्षा निर्जलीकरण की हद और दर के व्यत्क्रमानुपाति होती है और निमेटोड के छोटी संख्या में बचे रहने की तुलना में बड़ी संख्या में बचने की सम्भावना होती है।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies