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रोडेन्ट नियंत्रण की मैकेनिकल विधियां

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रोडेन्ट नियंत्रण की मैकेनिकल विधियां

a. ट्रैपिंग : इससे जनसंख्या कम तो होती है लेकिन उससे आगे की वृद्धि रुकती नहीं है। यह तभी प्रभावी है जब उनकी संख्या कम हो। पकड़े गये चूहों के पिंजरों को तालाब में डूबाकर उन्हें मारना चाहिए और मरे हुए चूहों को गाड़ना चाहिए। बैक ट्रैप्स तोड़ने से ट्रैपिंग के समय चूहे मर जाते हैं। ट्रैप कहां लगाया है और उसमें क्या चारा रखा है, इनसे तय होता है कि खेतों, घरों और गोदामों में कितने प्रभावी ढंग से चूहे पकड़े जाएंगे. तंजावुर बाँस के ट्रैप, पॉट ट्रैप और ब्रेक बैक ट्रैप खेतों में चूहे पकड़ने में काफी उपयोगी साबित होते हैं। मालगोदामों/घरों में जो भौतिक विधियां अपनाई जाती हैं, वे हैं खड्डों में काँच के टुकड़ों के साथ सीमेंट का प्लास्तर करना, अच्छी तरह बंद होने वाले दरवाज़े लगवाना, बिना किसी सीढ़ी के 75 सेमी ऊंची चौकी बनवाना, दरवाजों के नीचे रैट प्रूफ मैटेलिक शीट लगवाना और बॉक्स ट्रैप व वंडर ट्रैप का उपयोग करना।

b. मारना- किसी व्यक्ति द्वारा इक्का-दुक्का चूहों को डंडे, झाड़ू या किसी अन्य तरीके से मारना।

File Courtesy: 
C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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