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रासायनिक विधियों से खरपतवार नियंत्रण

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रासायनिक विधियों से खरपतवार नियंत्रण

शाकनाशी: वे रसायन जो अन्य पौधों (फसलों) को बड़ा नुकसान पहुंचाए बिना कुछ पौधों (खरपतवार) को नष्ट कर सकते हैं।

शाकनाशी गतिविधियां: यदि शाकनाशी उस पौधे के अंकुरण और उसकी विकास प्रक्रिया में बाधा डाल पाता है, उसे रोक पाता है या उससे बचाव कर पाता है तो उसे सक्रिय शाकनाशी कहा जाता है।

शाकनाशी चयनात्मकता: इसका संबंध उस अवधारणा से है जिसमें एक रसायन मिश्रित पादप समूह में लक्षित पादप की प्रजाति को तो समाप्त कर देता है लेकिन अन्य पौधों पर उसका कोई असर नहीं या मामूली असर होता है। शाकनाशी चयनात्मकता ही एकमात्र प्रभावी घटक है जो फसलों में रासायनिक खरपतवार नियंत्रक विधि को सफल बनाता है।

शाकनाशी के लाभ:

  • प्री इमरजेंट (पूर्व आपातिक) शाकनाशियों से सीज़न की शुरुआत में ही खरपतवार नियंत्रण में आ जाता है। यह काफ़ी लाभकारी है क्योंकि खरपतवार से खतरा बाद की अवस्था के बजाय शुरुआती चरणों में अधिक होता है।
  • खरपतवार नियंत्रण के लिए शाकनाशियों का छिड़काव उन क्यारियों में किया जा सकता है जहां फसल उगाना संभव नहीं है।
  • अन्य विधियों के मुकाबले बेहद प्रभावी।
  • सर्वांगी शाकनाशी लगातार आने वाले कई खरपतवार प्रजातियों को अन्य विधियों के मुकाबले अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकता है।
  • उनके उपयोग से बुवाई से पहले जुताई करने की ज़रूरत कम हो जाती है
File Courtesy: 
C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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