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नीची भूमि का जल संतुलन

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1. चावल की नीची भूमि की बाढ़ की प्रकृति के कारण इसका जल संतुलन और जल उत्पादकता, अन्य अनाजों जैसे गेहूं और मक्के, से अलग होती है।

2. चावल की नीची भूमि वाले खेत में जल का निवेश रिसाव, अंत:स्रवण, वाष्पीकरण और प्रस्वेदन द्वारा होने वाली जल की क्षति की पूर्ति के लिए आवश्यक हो जाता है। 

3. रिसाव पार्श्व सतह पर जल का प्रवाह है और अंत:स्रवण जड़ क्षेत्र के नीचे का जल प्रवाह है।  

4. रिसाव और अंत:स्रवण के लिए प्रारूपी संयुक्त मान 1-5 मिमी d-1 भारी चिकनी मिट्टी में और 25-30 मिमी d-1 रेतीली मिट्टी और रेतीली दुमट मिट्टी में पाया जाता है।  

5. जमे हुए जल की सतह पर वाष्पीकरण होता है और प्रस्वेदन पौधे के पत्तों से होकर जल की क्षति है। चावल के खेत की वाष्पीकरण-प्रस्वेदन की संयुक्त प्रारूपी दर आर्द्र मौसम में 4-5 मिमी d-1 और शुष्क मौसम में 6-7 मिमी d-1, लेकिन ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मानसून आने से पूर्व यह बढ़कर 10-11 मिमी d-1 हो जाता है। 

6. चावल के खेत में जल का कुल मौसमी निवेश (वर्षा और सिंचाई को मिलाकर) छिछले भूमिगत जल वाली भारी चिकनी मिट्टी में न्यूनतम 400 मिमी से लेकर गहरी भूमिगत जल वाली मिट्टी की खुरदुरी संरचना में अधिकतम 2000 मिमी से अधिक होता है।

 

File Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.org/watermanagement/index.php/the-water-balance-of-lowland-rice
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