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B के कार्य

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1. संवहनी ऊतक (फ्लोएम/ जाइलम) के विकास में आवश्यक। 

2. कॉम्लेक्सेज के निर्माण के जरिए कार्बोहाइड्रेट के परिवहन को बढ़ावा देना। 

3. सुक्रोज के संश्लेषण में प्रत्यक्ष रूप से शामिल रहता है। 

4. पौधों की प्रतिरक्षी प्रणाली में कार्य करता है, क्योंकि यह लिग्निन, शिकिमेट मार्ग के जरिए फाइटोऐलेक्सिन्स के जैव-संश्लेषण में भाग लेता है। 

5. पराग के अंकुरण/निषेचन में मदद करता है और इस प्रकार दाने/पुष्प-गुच्छ की संख्या में वृद्धि करता है।  

6. कोशिका भित्ति का संश्लेषण तथा लिग्नीफिकेशन में भूमिका निभाता है। 

 

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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