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फ़सल (चावल) के रोगों/पीड़कों पर सिलिकन (Si ) की भूमिका

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1.Si की आपूर्ति बढ़ने से (बाढ़ की स्थिति में), पत्तियों की Si मात्रा भी बढ़ जाती है, जिससे राइस ब्लास्ट जैसे कवक रोगों के प्रति संवेदनशीलता में भी गिरावट आती है। 

2. हाइफी (उत्तकों का सिलिफिकेशन) के भेदन के ख़िलाफ एपिडर्मल कोशिकाओं में भौतिक अवरोध के निर्माण मुख्य विधि है, जिसके जरिए  Si राइस ब्लास्ट जैसे रोगों के प्रति प्रतिरोध पैदा करता है। इसके अलावा  Si  पौधों में घुलनशील  N की मात्रा को कम करता है, जिससे मिट्टी में चिटिनेज सक्रियता को प्रेरित होती है। 

3. राइस ब्लास्ट के नियंत्रण में खासकर उच्च नाइट्रोजन की स्थिति में  Si पौधों में  Si की मात्रा को तनु बनाता है, जो बढ़े हुए वृद्धि/फाइटोमास के कारण होता है।  

4. अन्य चावल रोग जैसे ब्राउन स्पॉट/शीथ ब्लाइट/स्टेम रॉट भी  Si के पोषण के कारण कम होता देखा गया है। हालांकि  Mg के साथ Si की अधिकता से  BLB की गंभीरता बढ़ती है।   

5.Si युक्त एपिडर्मल कोशिया भित्तियां स्टाइलेट के लिए तथा खासकर चूषक (ऐफिड्स, बीपीएच)/बाइटिंग (जी.एम, एसबी) के लिए यांत्रिक अवरोध के रूप में कार्य करती हैं। 

6. यह देखा गया है कि चावल के पौधे पर जीवित रहने वाले SB लार्वा के मेंडिबुल्स उच्च Si के कारण क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। BPH के लिए घुलनशील सिलिसिक अम्ल  संचित Si (ओपल) की तुलना में चूषक कीटों को रोकने में अधिक प्रभावी माना जाता है। 

7.Si की सांद्रता 10 mg l -1 को प्रभावी माना जाता है। 

 

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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