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मृदा स्वास्थ्य की निगरानी

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1. मृदा स्वास्थ्य की वास्तविक समय वाली निगरानी संभव नहीं,

पर उपयुक्त समयांतरालों में संकेतकों के मापन के जरिए इसकी निगरानी की जा सकती है, जो उनकी संवेदनशीलता पर निर्भर करती है और इसके लिए मानक विधियों का प्रयोग किया जाता है, जिनमें मृदा स्वास्थ्य में होने वाले परिवर्तनों को परखा जाता है, ताकि रक्षात्मक कदम उठाए जा सकें।  

2. यदि अहम प्रवृत्तियां किसी काफी कोलाहलपूर्ण संकेत से ली जाएं तो मुख्य समस्या है नमूनों के बीच भिन्नता, जिससे उचित नमूना एकत्रण तथा विश्लेषण विधि के इस्तेमाल की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि मृदा के कई गुणों में परिवर्तन की दरें निम्न और अल्प होती हैं, वहीं कुछ मृदा गुण तीव्रता से बदलते हैं (खासकर वे जो प्रबंधन पद्धतियों से प्रभावित होते हैं तथा वे जो संदूषकों के आगत के प्रति संवेदनशील होते हैं।)। जिस समयांतरालों पर मृदा के स्वास्थ्य के संकेतकों को मापा जाता है वे नियत रहते हैं।   

 

 

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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