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Mat nursery मैट नर्सरी

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यांत्रिक विधि से किया जाने वाला धान-प्रतिरोपण (सेल्फ-प्रोपेल्ड राइस ट्रांसप्लांटर या हस्त चालित ट्रांसप्लांटर द्वारा) बिचड़े की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

a.आवश्यक सामग्री: पॉलिथीन शीट, लकड़ी या लोहे का फ्रेम, अच्छी तरह तैयार कर महीन की गई मिट्टी, एफवायएम, अंकुरित और उपचारित धान के बीज।

b.बीज की तैयारी :  बीज को अनुशंसित तरीके से तैयार किया जाता है और जूट के बोरे में बंद कर एक रात तक पानी में भिंगोया जाता है। इसके बाद बीज की बोरी को पानी से निकाल कर खुली हवा में रखा जाता है ताकि 1-2 मिमी लंबे अंकुर निकल आएं। बीजों के अगर ढेले बनें हों तो उन्हें तोड़ लेना चाहिए ताकि बीजों का वितरण समान रूप से हो सके।

c.बिचड़ों के लिए प्रयुक्त खेत की माप: बिचड़े वाला खेत बिल्कुल समतल और घास या खर-पतवार से बिल्कुल मुक्त होना चाहिए। 16 x 1 मी. की वस्तविक बुआई क्षेत्रफल वाली तीन क्यारियां एक हे. की रोपाई के लिए आवश्यक मात्रा में बिचड़े उत्पादित करती हैं। बिचड़े की आवश्यकता के अनुसार बीज-क्यारी का आकार तय करना चाहिए।  

d.फ्रेम: एक समान मैट साइज के लिए हटाए जा सकने वाले फ्रेम का इस्तेमाल किया जाता है। मैट फ्रेम की माप मशीन के ट्रे की माप के बराबर होना चहिए। लकड़ी या लोहे का डंडा (2.5× 0.3 सेमी) फ्रेम की सीमा बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।  

e.मिट्टी और गोबर का मिश्रण: मिट्टी को अच्छी तरह तैयार कर और चाल कर भुरभुरी (कणों का आकार 4-5 मिमी से कम होना चाहिए) बना लेना चाहिए और उसमें 2:1 के अनुपात में एफवायएम मिलाना चाहिए। एफवायएम को भी अच्छी तरह बारीक बना लेना चाहिए ताकि मिट्टी में उसे एकसमान रूप से मिलाया जा सके। इस मिश्रण में कंकड़-पत्थर या अन्य अवांछित वस्तुएं नहीं होनी चाहिए। 

f.बिचड़े की क्यारी (बीज शैय्या) तैयार करना: क्यारी के लिए लिए चुने गए भूखंड पर पॉलिथीन(130 सेमी ×1650 सेमी) शीट बिछाया जाता है। पॉलिथीन शीट के ऊपर फ्रेम को इस तरह रखना चाहिए कि अन्दर की चौड़ाई 100 सेमी हो जाए। मिट्टी और एफवायएम के बारीके मिश्रण को पॉलिथीन के ऊपर फ्रेम में बिछा लिया जाता है। क्यारी की माप 100 सेमी× 1600 सेमी ×1.5 सेमी होती है। क्यारी के अन्दर मिट्टी और एफवायएम के बारीके मिश्रण को समतल करने और थोड़ा दबाने के लिए लकड़ी के पाटे का प्रयोग किया जा सकता है।  

g.अंकुरित बीजों की बुआई: क्यारी में अंकुरित बीजों को 1किग्रा/वर्ग मी की दर से एक समान रूप से बोना चाहिए। बुआई के बाद क्यारी में पानी का छिड़काव करना चाहिए। 

h.जल प्रबंधन: क्यारियों को हल्के जूट के बोरे या पुआल से ढक देना चाहिए और ढकी हुई स्थिति में 4 दिनों तक पानी का छिड़काव करना चाहिए ताकि मिट्टी किसी भी समय सूखे नहीं। 4 दिनों के बाद क्यारी के आवरण हटा देना चाहिए। पानी का छिड़काव एक सप्ताह तक जारी रखना चाहिए। इसके बाद बिड़वे की इतनी ऊंचाई हो जाती है कि अब क्यारी में पानी छिड़ककर देने की बजाए बहाकर दिया जा सकता है। पानी का स्तर बिचड़े की ऊंचाई का आधा रहना चाहिए।

i.बिचड़े को उखाड़ना: बिचड़े जब 3-4 पत्तियों के साथ 15 सेमी की ऊंचाई के हो जाएं तब उखाड़े जाने के लिए तैयार होते हैं। इसके बाद रोपण करने वालों द्वारा उपयोग किए जाने के लिए बिचड़े के मैट को टुकड़ों में काट लिया जाता है।

 

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