Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

उत्तर प्रदेश में बासमती/सुगन्धित चावल उत्पादन परिदृश्य

PrintPrintSend to friendSend to friend

उत्तर प्रदेश में बासमती/सुगन्धित चावल उत्पादन परिदृश्य

  • उ.प्र. के 72 जनपदों में से 36 जनपदों- बिजनौर, सहारनपुर, रामपुर, बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, गौतमबुद्ध नगर, बागपत, बदायूं, सहाजपुर, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, जेपी नगर, आगरा, एटा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, मैनपुरी, फरूक्खाबाद, कन्नौज, कानपुर, रमाबाई नगर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, महामाया नगर, एंव लखीमपुर खीरी में बासमती चावल की परम्परागत, नवविकसित व सुगन्धित प्रजातियों का उत्पादन उनकी भौगोलिक, मृदा, कृषि व मौसमी परिस्थितियों के अनुसार होता है।
  • उ.प्र को 02 क्षेत्रों (1- बासमती क्षेत्र तथा 2- गैर बासमती क्षेत्र) में विभाजित किया जा सकता है।
  • गैर बासमती क्षेत्र वह है जिसमें मृदा व मौसमी घटक जैसे तापमान, बरसात, टोपोग्राफी,मिट्‌टी व जल संचयन की दशा बासमती चावल के उत्पादन के अनुकूल नही होती है।
  • गैर बासमती क्षेत्र में संकर (हाइब्र्रिड), देशी व नवविकसित चावल की प्रजातियां जो प्रतिकूल परिस्थ्ितियों में भी अधिक उत्पादन देने वाली होती हैं को उगाया जाता है।
  • बासमती नियन्त्रण रेखा (LOC) लखीमपुर खीरी से शुरू होकर सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, व कानपुर होते हुए औरैया तक जाती है।
  • उ.प्र मे बासमती तथा गैर बासमती क्षेत्र तथा नियन्त्रण रेखा को चित्र में दर्शाया गया है।
     
  • बासमती चावल की परम्परागत प्रजातियों को मुख्यत: सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, बरेली व उन्नाव में 5000 हे0 से अधिक क्षेत्र में उगाया जाता है इसके अलावा मेरठ, बदायूं व रामपुर में भी ये प्रजातियां औसतन कुछ कम क्षेत्र में उत्पादित की जाती है।

 

File Courtesy: 
C S Azad Univeristy of Agriculture and Technology, Kanpur
Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies