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बासमती चावल की पारम्परिक प्रजातियां

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बासमती 370 :

  • अपनें बेहतर स्वाद एवं ख्शुाबू के लिए प्रसिद्व, वर्ष 1933 में नगीना केंन्द्र द्वारा विकसित यह प्रजाति आज भी अपना एक मुकाम बनाये है।
  • पकने के बाद इसके दानों की लम्बाई में लगभग दो गुनी वृद्वि हो जाती है।
  • इसके पौधों की ऊंचाई 150 से0 मी0 होती है।
  • यह 145 से 150 दिन में पक जाती है।
  • इसकी औसत उपज 25-30 कुन्तल प्रति हेक्टेअर है।
     
File Courtesy: 
C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
Image Courtesy: 
C S Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur
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