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चावल की जड़ें(मूल)

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चावल की जड़ें(मूल):

1.चावल के दानों के अंकुरण के तुरंत बाद पौधे के आधार भाग के बाहर और भीतर की ओर रेशेदार मूल तंत्र विकसित होता है।
2.अंततः तने (नाल) के निचले पर्व से शाखायुक्त उपस्थानिक मूल निकलते हैं।
3.जड़ों की साइज और लंबाई विभिन्न होती हैं। जल निकास की दशा में जड़ों का विकास अच्छा होता है जो कि पौधे के ऊपरी विकास के समानुपाती होता है।
4. जड़ों का अधिकतम विकास टिलरिंग अवस्था में होता है, इसके बाद इसमे कमी आने लगती है और दाने लगने की अवस्था तक आते-आते इनका विकास रुक जाता है।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
Image Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
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