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खरपतवारों का वर्गीकरण, जीवन चक्र

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खरपतवारों का वर्गीकरण:

जिस प्रकार धान विभिन्न पारिस्थितिकी दशाओं में उगाया जाता है, उसी तरह खरपतवारों की किस्में एवं सघनता पर भी इनका प्रभाव होता है अर्थात सभी दशाओं में खरपतवारों का समिश्रण समान नहीं होता है ।

जीवन चक्र: इस आधार पर खरपतवारों को

(१) वार्षिक एवं

(२) बहुवर्षीय वर्गों में विभाजित किया जा सकता है ।

जो खरपतवार वर्ष में एक या एक से अधिक जीवन चक्र पूरा कर सके, वार्षिक कहलाते हैं ।बहुवर्षीय खरपतवार सामान्यतः कायिक प्रवर्धन द्वारा संतति-वृद्धि करते हैं । शल्ककंद(Bulb) एक भूमिगत कली है, प्रकंद (Rhizomes) भूमिगत तना है, जिसमें गांठ तथा छोटी पोरियां और विशेष प्रसुप्त कलियां होती हैं, इनमें भोजन एकत्र रहता है, जिससे वर्ष-दर -वर्ष ये जीवन चलाते रहते हैं । साइनोंडोन डेक्टाइलोन (दूब) प्रकंदीय खरपतवार है । भूस्तारी (Stolons) क्षैतिजीय बढ़ने वाला तना है, जिसमें लम्बी पतली पोरी होती है, भूमि के सम्पर्क में आने पर इनकी गांठों से अपस्थानिक जड़ें फूट निकलती है तथा नया पौधा बन जाता है । कंद एक विशेष प्रकार की रचना है, जो तना अथवा जड़ के अग्रशिखा के फूलने से बनता है, इसमें भोजन भंडारित रहता है । भूमि से ऊपर के भाग को काटने पर इसी भंडार से भोजन की पूर्ति होती है तथा पौधा बढ़ता रहता है । साइपेरस रोटडंस (मौथा) ऐसा ही खरपतवार है ।

File Courtesy: 
http://rkmp.iari.res.in/index.aspx
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