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जल प्रबंधन

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जल प्रबंधन

प्रभावी जल प्रबंधन के लिए खेत समतल होना चाहिए। प्रतिरोपण करने के समय से लेकर बीजांकुरण के समय (10 DAT) तक 1-2 सेमी तक का पानी का स्तर बना कर रखा जाना चाहिए और बीजों से अंकुर निकलने में सहयोग देने के लिए इसे बढ़ा कर 2-3 सेमी पर बना कर रखा जाना चाहिए। बीजों से अंकुर निकलने के अधिकतम चरण के बाद सैचुरेशन बनाए रखने के लिए पानी को निकाल देना चाहिए ताकि अनुपजाऊ बीजों से अंकुर निकलने से रोका जा सके और पौधों की एक समान वृद्धि और विकास हो। हेडिंग और पुष्पन के चरणों पर पानी का स्तर 10 सेमी की गहराई तक और मिल्किंग चरण पूरा होने तक पानी का स्तर 5 सेमी तक बना कर रखा जाना चाहिए। अंततः कटाई से 15 दिन पहले खेत से पानी को निकाल देना चाहिए।

नीची भूमि वाले चावल में जल प्रबंधन:

अनाज वाली फसलों में प्रति मिमि उपयोग किए गए पानी के लिए चावल की उत्पादकता बहुत कम है जो कि एक हेक्टेयर में प्रयोग किए गए मिमि पानी पर 3 से 7 किलोग्राम है। नर्सरी से लेकर मुख्य खेत (परिपक्वता तक) तक चावल उगाने के लिए पानी की कुल आवश्यकता 1200 से 1500 मिमि तक होती है जो कि फसल की अवधि, मिट्टी के प्रकार और जलवायु पर निर्भर करती है।

  • रोपाई के समय, 2 सेमी की उथली गहराई पर्याप्त होती है क्योंकि पानी की अधिक गहराई के कारण बीजों से अंकुर निकलने में कमी होती है।
  • 7 दिनों तक 2.0 सेमी पानी को बनाए रखें ।
  • स्थापना के चरण पर फसल के विकास की अवधि के दौरान 5.0 सेमी पानी को बना कर रखा जाए।
  • दुम्मटी मिट्टी के लिए पानी समाप्त होने के बाद गर्मियों में एक दिन और सर्दियों में 3 दिन के बाद पानी दें।
  • क्ले मिट्टी के लिए गर्मियों में पानी समाप्त होने के तुरंत बाद तथा सर्दियों में 1 से 2 दिन के बाद पानी दें। 
  • पानी की आवश्यकता के लिए महत्वपूर्ण चरण

i). आरंभिक( प्राइमोरडियल इनिशिएशेन)

ii). बूटिंग,

iii). हेडिंग और

iv). पुष्पन

बूट पत्ते के चरण पर अतिरिक्त पानी 75.0 सेमी के कारण हेडिंग में देरी हो जाती है और पुष्पगुच्छ के विकास में कमी होती है। कटाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद करें।

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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