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एकीकृत पोषक प्रबंधन

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एकीकृत पोषक प्रबंधन

अधिक उपज सुनिश्चित करने के लिए आईएनएम को अपनाना आवश्यक है। जहां तक संभव हो मिट्टी जांच की सिफारिश के अनुसार उर्वरक डालें। यदि इसका पालन नहीं किया जाता है तो सभी के लिए एक जैसी सिफारिश का पालन करें जैसा कि उत्तर प्रदेश राज्य में पालन किया जाता है।

सभी P2O5 और K2O को जुताई के समय आधार रूप में क्वार्टरिंग विधि के रूप में केवल कोर्स टेक्सचर्ड (कम सीईसी) में प्रयोग में लाया जाना चाहिए, K को दो चरणों में प्रयोग किया जाना चाहिए- 50% आधारभूत स्तर पर और 50% बीजों से अंकुर निकलने/पुष्पगुच्छ निकलने की शुरूआत होने के चरण पर लगाया जाए।

N को तीन चरणों की खुराकों में लगाया जाना चाहिए- 50% आधारभूत चरण पर + 25% बीजों से अधिकतम अंकुर निकलने के चरण पर + 25% चावल में पुष्पगुच्छ निकलने के चरण पर।

File Courtesy: 
सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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